जिंदगी क्या है? 

जमील अत्तारी

एक बार समुद्र के किनारे एक लहर आई।

वो लहर एक बच्चे की चप्पल को अपने साथ बहा ले गई। बच्चे ने रेत पर उंगली से लिखा ’समुद्र चोर है’ 

उसी समुद्र के दूसरे किनारे पर कुछ मछुआरों ने खुब सारी मछलियां पकड़ी। एक मछुआरे ने रेत पर लिखा ’समुद्र मेरा पालनहार है’ 

एक युवक समुद्र में डूबकर मर गया तो उसकी पत्नी ने रेत पर लिखा ’समुद्र हत्यारा है’

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वही एक किनारे पर भिखारी रेत पर टहल रहा था।

उस भिखारी को लहर के साथ तैर कर आया मोती मिला, भिखारी ने रेत पर लिखा ’समुद्र दानी है’

अचानक एक बड़ी लहर आई और सारे लिखे को मिटा कर चली गई।

लोग समुद्र के बारे में कुछ भी कहें लेकिन समुद्र अपनी लहरों मे मस्त रहता है। अपना क्रोध और शांति अपने हिसाब से तय करता है।

अगर समुद्र बनना है तो किसी के निर्णय पर ध्यान न दें। जो करना है अपने हिसाब से करें।

जो गुजर गया उसकी चिंता न करें। हार-जीत, सुख-दुख, खोना-पाना इन सबके चलते मन विचलित न करें।

अगर जिंदगी सुख और शांति से भरी होती तो इंसान जन्म लेते समय रोता नहीं।

जन्म के समय रोना और मरकर रूलाना, इसकी के बीच के संघर्ष भरे समय को जिंदगी कहते हैं।

’कुछ जरूरतें पूरी तो कुछ ख्वाहिशें अधूरी’ इसी का नाम जिंदगी है।

मैं आपसे सिर्फ 3 चीजें चाहता हूं, उम्मीद है आप इनमें से 2 चीजें जरूर करोगे। 

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